शब्द रंग

विभिन्न रचनाकारों के शब्द रोहित रुसिया के रंग और रेखाओं के साथ

सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

यादें - मोहन कुमार नागर


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रंग ज़िंदगी तरह - विजेन्द्र एस. विज



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रविवार, 27 जनवरी 2013

बहनें (१) - विनोद कुमार श्रीवास्तव

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चुप्पी की भी अपनी राजनीति है - नित्यानंद गायेन


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सोमवार, 14 जनवरी 2013

सच का सच - दिनेश भट्ट



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जीना - अमितेष


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लेबल: अमितेष, कविता पोस्टर, छंदमुक्त

फिर कब आएँगे- नईम


प्रस्तुतकर्ता Unknown पर 4:27 am 3 टिप्‍पणियां:
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लेबल: कविता पोस्टर, नईम, नवगीत
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रोहित रुसिया



रोहित रुसिया ने केन्द्रीय विद्यालय में अध्ययन के दौरान अपने चित्रकला शिक्षक श्री आसिफ के सान्निध्य में कुछ बारीकियाँ सीखीं, जिन्हें अपने परिश्रम और अभ्यास से विकसित कर एक स्वतंत्र शैली का निर्माण किया। लोक रंग में बसी उनकी रेखाएँ मन की संवेदना को बारीकियों से रचती है और उनके रंग संवादों को गहराई से व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि उनके कविता पोस्टर इतने सजीव एवं आकर्षक होते हैं।

उनके कविता पोस्टरों की अबतक दुबई ( यु ऐ.ई ) ,मॉरिशस ,लखनऊ , भोपाल, छिंदवाड़ा के साथ साथ देश के अन्य स्थानों पर प्रदर्शनियाँ आयोजित की जा चुकी हैं। चित्रकला के अतिरिक्त लेखन,फोटोग्राफी और संगीत में भी रुचि। अब तक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, गीत-गजल और रेखाचित्रों के प्रकाशन के अतिरिक्त आकाशवाणी से कविताओं का नियमित प्रसारण भी हो चुका है।

संप्रति वे कल्याण आयुर्वेद के निदेशक हैं।

दूरभाष- 09425871600
ईमेल- rohitkalyaan@yahoo.com


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